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महाराणा राजसिंह पैनोरमा

मेवाड ने अपने त्याग, देश भक्ति व गौरवशाली अतित को लेकर देश व विदेशो में भी अपनी अलग पहचान बना रखी है। राजसमंद जिला मुख्यालय पर स्थित राजसमंद झील जो कि अपनी अदभुद बनावट व उत्कष्ठ वास्तुकला के कारण आमजन के दिलो दिमाग में छाई हुई है, ऐसे में उक्त महान कार्य को पुरा कराने वाले राजसमंद के संस्थापक महाराणा राजसिंह के त्याग, समर्पण, गौरवशाली, कलाप्रेमी को बिना स्मरण किये केसे रह सकते है। मेरे मन में सदेव यह सवाल उठता रहता था कि शासन तो आएँगे ओर जाएंगे पर शासन में रहते हुए उन महान विभुतियो के लिए हमने क्या प्रयास किया यह बात सदेव हदय के पटल पर हर समय यह सवाल बन कर उठता था। जिस राजसमंद के संस्थापक महाराणा राजसिंह जी के अदभुद कलाप्रेम की बेमिसाल बनावट व कलाकर्ति राजसमंद झील ने जहा पुरे देश में अपनी अलग पहचान बनाई है, एेसे महान संस्थापको को आमजन की चिर स्मृति में केसे सझोए रखे तथा ऐसा क्या हो कि इन महान व्यक्तियों को आने वाली पिढी पढे, सुने व देखे।
इस बारे में प्रदेश की सरकार को अपने मन की बात बता कर महाराणा राजसिंह जी के जीवन दर्शन पर कुछ विशेष कार्ययोजना को मुर्त रूप देन की अपनी मंशा व्यक्त की ताकि ऐसे महान महाराणा आमजन की स्मृति में सदेव बने रहे।

प्रदेश की सरकार ने भी महान व्यक्तित्व के धनी राजसमंद के संस्थापक महाराणा राजसिंह के जीवन दर्शन को आमजन तक पहुचाने के लिए राजसमंद झील के किनारे नोचोकी पाल के समीप स्थित राजमहल में महाराणा राजसिंह पैनोरमा बनाया गया।
यहा महाराणा राजसिंह के जीवन से जुडे विभिन्न प्रसंगों को स्टैच्यु के माध्यम से अभिव्यक्त किया गया है।
उक्त ऐतिहासिक कार्य में राजस्थान धरोहर संरक्षण एवं प्रोन्नति प्राधिकरण के अध्यक्ष औकारसिंह लखावत के मार्गदर्शन और प्रमुख शासन सचिव कला एवं संस्कति विभाग के कुलदीप रांका के निद्रेशन में बनाया गया। प्राधिकरण के मुख्य कार्यकारी अधिकारी टीकम बोहरा ने इस पेनोरमा की पटकथा लेखन और डिस्प्ले बनाने का कार्य किया। प्राधिकरण के सदस्य कवल प्रकाश किशनानी के परामर्श से अजमेर जमाल ने पेनोरमा में डिस्प्ले का कार्य किया। पेनोरमा भवन का निर्माण कार्य प्राधिकरण के अधिशाषी अभियंता सुरेश स्वामी के निर्देशन में सहायक अभियंता सोहन लाल प्रजापति के द्वारा कराया गया। इस पेनोरमा में 2डी फाईबर पेनल 3डी फाईबर मूर्तियां जयपुर के अलोक बनर्ती के द्वारा बनाई गई।

पेनोरमा का राजस्थान की मुख्यमंत्री श्रीमती वसुन्धरा राजे जी और भाजपा के राष्टीय अध्यक्ष श्री अमित शाह जी के दवारा राजस्थान की गौरव यात्रा के दौरान विधिवत उद्घाटन किया गया। उक्त पेनोरमा को देखने के लिए बडी सख्या में स्थानिय व बाहर से पर्यटक पहुच रहे है। पर्यटक पेनोरमा के साथ ही नोचोकी की पाल का पर घूमकर वास्तुकला की अदभुद कलाकर्ति को निहार रहे है वही झील में वर्षा के दौरान खुशनुमा मोसम को भी आनंद ले रहे है।

राजसमंद के गौरव महाराणा राजसिंह जी का जन्म 24 सितम्बर 1629 को हुआ। उनके पिता महाराणा जगतसिंह जी और मां महारानी जनोद कुंवर मडेतनी जी थी। मात्र 23 वर्ष की छोटी आयु में उनका राज्यभिषेक हुआ था। राजा
महाराणा राजसिंह जी न केवल कला प्रेमी, जन जन के चहेते, वीर और दानी पुरूष थे बल्कि वे धर्मनिष्ठ, प्रजापालक और बहुत कुशल शासन संचालक भी थे। उनके राज्यकाल के समय लोगों को उनकी दानवीरता के बारे में जानने का मौका मिला। उन्होने कई बार सोने, चांदी, अनमोल धातुए रत्नादि के तुलादान करवाए और योग्य लोगों को सम्मानित भी किया।
राजसमंद झील के किनारे नौचोकी पर बडे बडे प्रस्तर पटटो पर उनकी राज प्रशस्ति शिलालेख बनवाए जो आज भी नौचोकी पाल पर देखे जा सकते है। इसके अलावा उन्होने अनेको बाघ बग़ीचे, फव्वारे, मंदिर, बावडियो, राजप्रासाद और सरोवर आदि का भी निर्माण कराया। उनके महान कार्यो में सबसे बडा कार्य राजसमंद झील पर पाल बांधना और कलार्पूण नोचैकी का निर्माण कहा जा सकता है। वे महान ईश्वर भक्त भी थे। श्री द्वारकाधीश जी और श्रीनाथ जी के मेंवाड आगमन के समय स्वय पालकी को उन्होने कंधा दिया और भव्य भावभिना स्वागत किया था। उन्होने बहुत से लोगों को अपने शासन काल में आश्रय दिया, उन्हे दुसरे आक्रमणकारियों से बचाया व सम्मानपूर्वक जीने का अवसर दिया। महाराणा राजसिंह जी स्थापत कला के बहुत प्रेमी थे। कुशल शिल्पकार, कवि, साहित्यकार और दस्तकार उनके शासन के
दौरान हमेशा उचित सम्मान प्राप्त करते थे। वीरयुवाओं व योग्य सामंतो को वे खुद सम्मानित करते थे। ऐसे महान शासक व मेवाड के गौरव को मेरा शत शत नमन।

1 Comment
  • Jitendra ladha

    Jitendra ladha

    अक्तूबर 29, 2018 | 08:44 अपराह्न

    महाराणा राज सिंह पैनोरमा देखने के बाद राजसमन्द के उज्जवल भविष्य की तस्वीर नजर आने लगी, पहले कभी सोचा ही नहीं था कि राजसमन्द में इस प्रकार का पर्यटन विकास भी हो सकता है। माननीय उच्च शिक्षा मंत्री किरण जी माहेश्वरी के विजन व दूर दृष्टि से ही राजसमन्द का विकास संभव है। अब लगने लगा है कि राजसमन्द में पर्यटन विकास की अपार संभावनाएं है।