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राजस्थान के बजट में विकास की न दृष्टि दिखी, नहीं नियत : किरण माहेश्वरी

राजस्थान सरकार के बजट से गहरी निराशा हुई। मुख्यमंत्री के बजट वक्तव्य में ना विकास की दृष्टि झलकती है, नहीं नियत। राज्य में विकास के सारे काम अवरुद्ध हो गए हैं, छोटे-छोटे भुगतान भी रुक गए हैं। पेट्रोल डीजल पर 4% कर लगा कर सरकार ने राज्य की जनता पर पहले ही ₹10000 करोड़ रुपयों का भार डाल दिया था।
मंदी की मार झेल रहे मार्बल उद्योग को प्रोत्साहन देने का बजट में कोई भी प्रस्ताव नहीं है। अनुत्पादक व्ययों पर नियंत्रण की अनदेखी की गई है।
क्षेत्रीय असंतुलन को दूर करने का कोई प्रयास नहीं किया गया है।
यह एक साधारण और नीरस बजट है। बजट में वाणिज्यिक बैंकों से दिए गए कृषि ऋणों से मुक्ति के लिए कोई प्रावधान नहीं कर जनता से धोखा किया गया है। रोजगार सर्जन और औद्योगिक विकास की उपेक्षा की गई है। मुख्यमंत्री ने चुनावी वादों से अपना मुंह फेर लिया है। 10 के मान पर इस बजट को अधिकतम 3 अंक दिए जा सकते हैं।

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